(चित्र साभार : गूगल) कहां से आता है प्रकाश ? कहते हैं कि अंधेरे के पास बहुत वक्त होता है, प्रकाश हमेशा जल्दी में होता है। अंधेरा हमारे आसपास हर कहीं बिखरा है। हमारे बाहर भी और हमारे भीतर भी। वह रात के अंधेरे में भी है और दिन के उजाले में भी। हम हर समय उसे महसूस करते हैं। उससे भयभीत होते हैं। उससे मुक्त भी होना चाहते हैं और बार-बार उसकी तरफ लौट भी जाना चाहते हैं। हमारे चारो तरफ रौशनी भी है, लेकिन अंधेरे से हमारी पहचान इतनी गहरी है कि हम उसे अपने भीतर महसूस नहीं कर पाते। वह क्षण भर के लिए कौंधता है और लौट जाता है। अंधेरा शायद हमारे संस्कार और हमारी आदतों में है। हम अंधेरे में प्रकाश की तलाश करते तो हैं, लेकिन जरा देर उसमें रहने के बाद हमें फिर अंधेरे की तलब होने लगती है। अंधेरे के प्रति हमारा आकर्षण बहुत गहरा है। धर्म और अध्यात्म कहते हैं कि प्रकाश हमारा स्वभाव है। अंधेरा और कुछ नहीं, प्रकाश के अभाव का नाम है। हमारा दुनियावी अनुभव कहता है कि हमारा स्वभाव अंधकार है। बिना किसी प्रयास के अंधेर...
"एक प्रयास.., मुकम्मल प्रस्तुति का"