हिचकी एक उम्मीद है उन छात्रों के लिए जो भेदभाव वाली दुनिया में जी रहे हैं हिचकी,,,, मैं पहले इसके बारे में क्लियर कर दूं कि ये है क्या..? हिचकी एक तरह की टॉरेट सिन्ड्रोम है जो न्यूरोलॉजीकल कंडीशन का ही एक रूप है। जब दिमाग के सारे तार आपस में जुड़ नहीं पाते हैं तो व्यक्ति को लगातार हिचकी आती है। और वह व्यक्ति अजीब-सी आवाजें निकालता है। हिचक एक ऐसी ही बीमारी से पीड़ित महिला नैना माथुर (रानी मुखर्जी) की कहानी है जिसे छात्र जीवन से लेकर के टीचर बनने तक कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इस फिल्म में रानी का किरदार अमेरिकन मोटिवेशनल स्पीकर और टीचर ब्रैड कोहेन से प्रेरित है, जो कि टॉरेट सिन्ड्रोम के चलते तमाम परेशानियां झेलकर भी कामयाब टीचर बने। उन्होंने अपनी लाइफ पर एक किताब भी लिखी, जिस पर 2008 में फ्रंट ऑफ द क्लास नाम से अमेरिकन फिल्म भी आई। अब बात करते हैं फिल्म और जरूरी मुद्दों की- फिल्म में एक ऐसी क्लास 9F को दिखाया गया है जिसमें पढ़ने वाले सभी १४ छात्रों को सिर्फ और सिर्फ इस लिए पढ़ने की परमिशन मिली है कि वे सभी छात्र एक मुन्सीपल्टी स्कूल से है जो उस स्कूल के सामने सिर...
"एक प्रयास.., मुकम्मल प्रस्तुति का"