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Showing posts with the label पुस्तक चर्चा

'मैं से मांँ तक' यह सिर्फ एक "स्त्री" की नहीं बल्कि आपकी-मेरी हम सबकी माँ की कहानी है - अंकिता जैन

दिवाली पर प्रकाशक (राजपाल एंड सन्स) ने तोहफ़ा दिया है... और किताब अब आप सबके हाथ में है... यह सिर्फ एक "स्त्री" की नहीं बल्कि आपकी-मेरी हम सबकी माँ की कहानी है किताब ऑर्डर करने के लिए लिंक :  अमेज़न प्री-बुकिंग लिंक पुस्तक 'मैं से मांँ तक' हम सभी ने अपनी माँ को माँ बने हुए देखा... माँ बनते हुए नहीं। बच्चे के जन्म के बाद से लेकर उसके परिपक्व हो जाने और उसके भी बच्चे हो जाने तक की यात्रा आजीवन चलती है। घर-परिवार, माहौल, समाज सभी इसमें सहयोगी होते हैं। मगर वे नौ माह जब बच्चा माँ के भीतर उसी का अंग बनकर पलता है, वे दोनों एक ही शरीर की तरह जीते हैं, कैसे होते हैं वे नौ माह? ख़ुशख़बरी मिलने के पहले दिन से लेकर बच्चे के जन्म तक के नौ माह एक बेहद अनोखी और एहसासों के अलग-अलग रंगों से सराबोर यात्रा रहती है। हिंदुस्तान में आज भी स्त्री के लिए माँ बनना वैसा ही है जैसे जीने के लिए साँस लेना। कोई भी स्त्री माँ 'न बनना' न ख़ुद चुनती है न चुन सकती है। अब बदलते ज़माने में आत्मनिर्भर स्त्री शादी न करना चुनने की हिम्मत जुटाने लगी है, मगर वह अकेली स्त्री भी ...

पुस्तक चर्चा - लौटती नहीँ जो हंसी (उपन्यास)

पुस्तक- लौटती नहीँ जो हंसी (उपन्यास) लेखक- तरुण भटनागर प्रकाशन- आधार प्रकाशन, पंचकूला (हरियाणा) पुस्तक चर्चा- शक्ति सार्थ्य ____________________________________ विश्व पुस्तक मेले मेँ आये इस सजीव उपन्यास को मुझसे ज्यादा पढ़ने की आवश्यकता तो नेताओँ को होनी चाहिए... खैर कोई बात नहीँ ! एक आदमी जो कहीँ दूर जगह से आकर किसी ऐसी जगह (गाँव, जहाँ के लोग थोड़े भोले और अनपढ़ भी) पर आकर बस गया जहाँ पर उसे शुरु मेँ अपनी बोल चाल की शैली पल दर पल शिँकजा कसना पड़ता है... फिर जब वह वहाँ पर अपने पैर जमा लेता है... तो फिर क्या कहने... उसकी बात वोले तो 'पत्थर की लकीर' वह गाँव का सरपंच बन जाता है और उस गाँव मेँ उसके मुकाबले पर एक और शख्स है जिसे वह हरसंभव नीचा दिखाना चाहता है! गाँव मेँ एक मोड़ जब आता है जब गाँव की सीट निचले वर्ग के लिए आरक्षित है, तभी गाँव मेँ आकर बसे वो शख्स जंगलो मेँ रहने वाले एक आदिवासी को अपने यहाँ बसा लेते है... सत्ता आदिवासी की हुकुम हमारा... ये खेल तो राजनीति मेँ आये दिन खेले जाते है... इसमेँ कोई दोहराये नहीँ लेकिन लेखक ने जिस गहन शैली का प्रयोग किया है वो ...

पुस्तक चर्चा - मेरी आँखों में मुहब्बत के मंजर है (काव्य संग्रह)

पुस्तक- मेरी आँखों में मुहब्बत के मंजर है (काव्य संग्रह) कवि- दिनेश गुप्ता 'दिन' मो.+91-9028299524, ईमेल- dinesh.gupta28@gmail.com पुस्तक चर्चा - शक्ति सार्थ्य __________________________________________ इश्क-विश्क, प्यार-व्यार पर न जाने कितनोँ ने लिखा और उनके अन्दाज, अल्फाज़, जज्बात आदि को स्वीकारा भी गया... इसी परम्परा को लेकर अपने नये अन्दाज, नयेँ अल्फाज़ और जज्बातोँ को लेकर हाजिर हुए हमारे जमाने के उभरते हुए युवा कवि दिनेश गुप्ता जी। इन्हे शायर की संज्ञा देने से तनिक भी परहेज़ नहीँ किया जा सकता क्योँकि ये अपनी लेखनी को शायरी के मायनों में 'ढलने' में महारथी भी हैँ.... ...प्यार उस पर अमल या फिर दिल का दर्द जो आज के संमलैँगिग होते हुए जमाने पर कुछ फीका सा होता जा रहा है... कुछ राजनीतिक षणयंत्रों या फिर प्यार को दागदार करते रिस्ते, चंद बेरुखे अल्फाज़ लिए तेजाब का इस्तमाल करतेँ असफल प्रेमी जो प्यार की कीमत को सेक्स (ये सार्वजनिक करना जरुरी है) मेँ तौलते हैँ... सभी युगल जोड़ी को दागदार बनाने मेँ लगे हुए जिससे प्यार अपनी मूल पहचान खोते हुए घीसे-पिटे रास्...

पुस्तक चर्चा - संवेदना के स्वर (काव्य संग्रह)

पुस्तक- संवेदना के स्वर (काव्य संग्रह) कवि- उमाशंकर चौबे 'संवेद' प्रकाशन- उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ (उप्र) मूल्य- ₹१५०/- पुस्तक चर्चा- शक्ति सार्थ्य _____________________________________________ कवि ने अपने पहले काव्य संग्रह 'संवेदना के स्वर' से लोगोँ की अंर्तमन संरचना उनका मर्म, संवेदना और ह्रदय मेँ निश्छल प्रेम के बीज बोने की सफलतम कोशिश की है। मुझे लगता है कि ये महज कोशिश  ही नहीँ सफल प्रयास भी है, जिसमेँ कवि चारोँ खानोँ से सफल दिखाई देता है।  कवि के अनुसार- सोये ह्रदय को स्पंदित करना, एक शांत सरोवर मेँ लहर पैदा करना, पत्थर मन मेँ विचारोँ को आरोपित करना या बजंर धरती पर संवेदनाओँ के बीज लगाना और उस बीज का अंकुरण ही संवेदना का स्वर है। इसी को केन्द्र मानकर बड़ी खूबसूरती से वुना गया है ये काव्य संग्रह! आइये अब चर्चा करते है इसके अंदर बसी रचनाओँ की-  इस पुस्तक की दूसरी कविता जिसका शीर्षक 'आ मैँ तुझको गीत सिखा दूँ' से कवि एक ऐसी भावना उकेरने की कोशिश करता है, जिसमेँ एक ऐसे युग की कल्पना है कि स्त्री के पायल की धुन पर पक्षियोँ का करलव जागृति होगा जो अब...

पुस्तक चर्चा - दिल्ली दरबार (उपन्यास)

पुस्तक - दिल्ली दरबार (उपन्यास) लेखक- सत्य व्यास प्रकाशन - हिंदयुग्म - वेस्टलैंड मूल्य - ₹१५०/- दिल्ली दरबार अमेज़न लिंक पुस्तक चर्चा - शक्ति सार्थ्य _____________________________________________ दिल्ली दरबार दो दोस्तों की कहानी है। नहीं-नहीं। सिर्फ एक ही की। दूसरा तो बेचारा कथावाचक है। राहुल मिश्रा की कहानी। मोहित उर्फ झाड़ी की जुवानी। राहुल मिश्रा के बहुत से किस्से है। उन किस्सों का साक्षी है मोहित। राहुल मिश्रा जब पढ़ने के लिए झारखण्ड से दिल्ली पहुंचता है तो वो उसकी चकाचौंध में घुल जाना चाहता है। जैसे:- दो-चार गर्लफ्रैण्ड होनी चाहिए एक की अनुपस्थित में दूसरे का साथ। मतलब अकेलापन नहीं चाहिए। हर पल मौज-मस्ती। अच्छा पहनना। अच्छा खाना। घूमना। वगैरह-वगैरह। राहुल मिश्रा के तो वैसे कई सारे अफेयर रहे लेकिन दो अफेयर कुछ ज्यादा ही खास रहे। एक तो मकान मालिक बटुक शर्मा की इकलौती बेटी परिधि शर्मा। और दूसरा महिका रायजादा के साथ। महिका रायजादा के साथ वाला अफेयर महिका का अकेले हो जाने की वजह से अपना अकेलापन दूर करने के लिए ही राहुल मिश्रा से हुआ था। परिधि शर्मा के साथ वाला अफ...

पुस्तक चर्चा - इश्क़ तुम्हें हो जायेगा (काव्य संग्रह)

पुस्तक- "इश्क़ तुम्हेँ हो जाएगा" (काव्य संग्रह) कवियत्री- अनुलता राज नायर प्रकाशक- हिन्द-युग्म प्रकाशन मूल्य - ₹ १००/- पुस्तक चर्चा - शक्ति सार्थ्य ------------------------------------------------------------ कविता मन मेँ चल रहे उन मापदण्डोँ का मापन करने मेँ पूर्णतया खरी उतरने के लिए प्रतिबध्द है जिसे किसी और माध्यम से सुलझाने मेँ कठिनता के साथ वक्त भी गवाँना पड़ता है। कविता एक माध्यम ही नही वरन् एक युक्ति भी है जिसे अपनाकर किसी भी शून्यता को जो अनायस ही आपके जीवन मेँ फैल पड़ी है को छाँटने मेँ सक्षम है। इश्क़ तुम्हे हो जाएगा... ऐसी कल्पनायेँ जो मिथ्या तो हो ही नहीँ सकती किन्तु सच्चाई के साथ चलने पर जरुर डगमगा जाती है। इश्क़ हरेक के नसीब मेँ नहीँ होता और न ही हरेक इसके नियमोँ का पालन कर पाता है, ग़र इश्क़ को इश्क़ तक ही सीमित रखा जाए तो शायद दुनिया मेँ इसके मुरीद कम ही रह जाए... कहने का तात्पर्य ये है कि इश्क़ की वदिँश मेँ उसके पालने मेँ पल रहे इश्क़-पुत्र का थोड़ा टकराव समाज के साथ होना लाज़िमी है, यही टकराव इश्क़ के पुख्तापन और गहराई का प्रतीक है... 'नाकाम इश्क़' ...