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डायबिटीज लोगों से जीवन-वर्ष छीन रहा है

आज के दौर में डायबिटीज होना आम बात है। सिर्फ अधिक उम्र के लोग ही नहीं अपितु आज के समय में इस रोग की चपेट में बच्चे भी आ रहे है। एक समय हुआ करता था कि ये रोग चालीस-पचास के उम्र के लोगों को हुआ करता था। लेकिन बदलते जमाने और लाईफस्टाइल ने इस रोग को आम और अधिक फैलने में मदद प्रदान किया है। जिसके चलते अब इस रोग की उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है, जो अब किसी भी उम्र में आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है। डायबिटीज के कारण:- डायबिटीज मुख्यतः हमारे शरीर में पेंक्रियाज ग्रंथि के ठीक से काम न करने या फिर खराब हो जाने से हमारे शरीर में उत्पन्न हो जाती है। दरअसल पेंक्रियाज ग्रंथि से तरह तरह के हार्मोन्स निकलते है, इन्हीं में से है इन्सुलिन और ग्लूकान। जहां इन्सुलिन का काम होता है हमारे शरीर में उत्पन्न हुए शुगर को पचाना। जिसके चलते शुगर का हमारे शरीर में बैलेंस बना रहता है। यदि हमारे शरीर में इन्सुलिन बनना बंद हो जाता है, तब हमारे शरीर में उत्पन्न हुई शुगर पच नहीं पाती है और जो हमारे खून और पेशाब में जाकर घुलना शुरू हो जाती है। जिसके कारण हमें डायबिटीज की शिकायत होनी लगती है। डायबिटीज आपको ...

सोशलमीडिया का प्रभाव - शक्ति सार्थ्य

गालियों का प्रयोग वही लोग करते है जो सिर्फ कमज़ोर है या फिर उनका कोई अपना मतलब होता है, मजबूत लोग हमेशा सही रणनीति और सही शब्दों का प्रयोग कर कुछ कर-गुजरने को तत्पर रहते है। इस संवेदनशील माहौल में जिस तरह से लोगों का लावा निकल कर बाहर आ रहा है, उसमें से अधिकतर अब भी अभद्र भाषा का प्रयोग करने से गुरेज़ नहीं कर रहे है। क्या हम बाकई में सभ्य समाज के सभ्य पुरुषों के वंशज है? क्या यही हमारी अखण्डता है? दोस्तों एक कहावत बचपन से सुनते आया हूँ "गरजने वाले बादल कभी बरसते नहीं" आज जिस तरह से लोग गरज रहे है, वे यही लोग है जो देश के प्रति अपनी जान न्योछावर करने का मौका मिलने पर अपने घर से बाहर तक नहीं निकलेगें। और हाँ सोशल मीडिया पर जरूर एक महायुद्ध छेड़ देंगें। जिस तरह से # कोबरापोस्ट ने कुछ शुभचिंतकों का स्टिंग ऑपरेशन कर उनकी देशभक्ति का प्रमाण प्रस्तुत किया है वो देखने योग्य है। ये लोग सोशल मीडिया पर चंद रूपयों के लिए कुछ भी लिखने को तैयार है। और हम उनके परम भक्त है जिसे वायरल करने में # SpeedySystem अपनाते हुए देश में संप्रदायिक महौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है।...

E-Learning Education System

आज बहुत ही तीव्रता से विस्तारित होते इस तकनीकी युग में शिक्षा का स्तर किताबों से प्रस्थान कर E-Learning Education System की ओर Shift होता जा रहा है। इसमें कोई दोहराये नहीं है कि महंगी और बोझिल होती शिक्षा को अब किताबों एंव ClassRoom से मैनेज करना छात्रों को भारी पड़ता जा रहा है। इसलिए छात्र अपनी सुविधानुसार इस बदलते परिवेश में अपनी Education का महंगा बोझ उतारने और उसे अधिक रोमांचित करने के लिये Online Platforms पर जा रहा है। जिसे उसे एक ही Click में सभी जरूरी Topics आसानी से उपलब्ध भी हो रहे है। Internet पर बहुत सारा ऐसा Study Material उपलब्ध है जो छात्रों को सही और बेहतर शिक्षा देने में मददगार साबित हो रहा है। यहीं से छात्र अपनी अपनी क्षमता के अनुसार एक Topic को विभिन्न प्रकार से पढ़ व समझ पाता है। जिससे वह छात्र अपने विवेक का सही प्रयोग कर उस Topic में महारत भी हासिंल कर सकता है। इस बदलते दौर को देखते हुए शिक्षक भी अब Online Platform पर अपनी क्षमता के अनुसार Paid एंव Free दोनों प्रकार के Courses उपलब्ध कराने में जुटे हुए है जिससे छात्र अपनी अपनी क्षमता के अनुसार उन Courses...

भारतीय शिक्षा प्रणाली - शक्ति सार्थ्य

[चित्र साभार - गूगल] कहा जाता है कि मानसिक विकास के लिए प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा ग्रहण करना अनिवार्य होता है, जिससे वह व्यक्ति अपने विकास के साथ साथ देश के विकास में भी मुख्य भूमिका अदा कर सके। अब सवाल उठता है कि- क्या भारत की शिक्षा प्रणाली हमारे मानसिक विकास के लिए फिट बैठती है? क्या हमारे विश्वविद्यालय, विद्यालय या फिर स्कूल छात्रों के मानसिक विकास पर खरा उतर रहे है?  क्या वह छात्रों को उस तरह से शिक्षित कर रहे है जिसकी छात्रों को आवश्यकता है? क्या छात्र आज की इस शिक्षा प्रणाली से खुश है? क्या आज का छात्र रोजगार पाने के लिए पूर्णतया योग्य है? असर (ASER- Annual Status Of Education Report) 2017 की रिपोर्ट बताती है कि 83% Student Not Employable है। इसका सीधा सीधा अर्थ ये है कि 83% छात्रों के पास जॉब पाने की Skill ही नहीं है। ये रिपोर्ट दर्शाती है कि हमारे देश में Youth Literacy भले ही 92% प्रतिशत है जो अपने आप में एक बड़ी बात है, लेकिन हमारी यही 83% Youth Unskilled भी है। जहाँ हमारा देश शिक्षा देने के मामले में हमेशा अग्रणी रहा है, और उसमें भी दिन-प्रतिदिन शिक्षा ...

तेरह नंबर वाली फायर ब्रिगेड (कहानी) - तरुण भटनागर

तेरह नंबर वाली फायर ब्रिगेड (कहानी)/                              कहते हैं यह एक सच वाकया है जो यूरोप के किसी शहर में हुआ था।          बताया यूँ गया कि एक बुजुर्ग औरत थी। वह शहर के पुराने इलाके में अपने फ्लैट में रहती थी। शायद बुडापेस्ट में, शायद एम्सटर्डम में या शायद कहीं और ठीक-ठीक मालुमात नहीं हैं। पर इससे क्या अंतर पडता है। सारे शहर तो एक से दीखते हैं। क्या तो बुडापेस्ट और क्या एम्सटर्डम। बस वहाँ के बाशिंदों की ज़बाने मुख्तलिफ हैं, बाकी सब एक सा दीखता है। ज़बानें मुख्तलिफ हों तब भी शहर एक से दीखते रहते हैं।             वह बुजुर्ग औरत ऐसे ही किसी शहर के पुराने इलाके में रहती थी, अकेली और दुनियादारी से बहुत दूर। यूँ उसकी चार औलादें थीं, तीन बेटे और एक बेटी, पर इससे क्या होता है ? सबकी अपनी-अपनी दुनिया है, सबकी अपनी अपनी आज़ादियाँ, सबकी अपनी-अपनी जवाबदारियाँ, ठीक उसी तरह जैसे खुद उस बुजुर्ग औरत की अपनी दुनिया है, उसकी अपनी आज़ादी। सो साथ रहने का ...

अधिकारों का राष्ट्रीय पर्व : गणतंत्र दिवस

अधिकारों का राष्ट्रीय पर्व : गणतंत्र दिवस आज २६ जनवरी है। और इस दिन को हम सब गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। क्योंकि आज ही के दिन हमारे देश में नागरिकों के अधिकारों के हित में संविधान को लागू किया गया था। जब हमारा देश १५ अगस्त १९४७ को आज़ाद हुआ था तब हमारे देश का अपना कोई मौलिक संविधान नहीं था। हमारे देश में नागरिकों के अधिकार के लिए संविधान निर्माण कार्य की एक कमेटी का गठन किया गया। जिसकी अध्यक्षता की कमान डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने संभाली। और अंततः दो वर्ष ग्यारह माह अठारह दिन के तत्पश्चात २६ जनवरी १९५० को हमारे देश में संविधान को लागू कर दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप हम-सब तब से लेकर आजतक २६ जनवरी को राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते चले आ रहे है। आज इस पर्व की महत्ता सिर्फ इतनी सी रह गई है कि हम इस दिन केवल और केवल अपनी औपचारिकता मात्र दिखाकर भारत की आज़ादी के शिखर पुरुषों का गुणगान करके, उन्हे सिर्फ अपने लाभकारी हितों के लिए ही याद करना है। जिसके चलते उनकी साख भी बनी रहे और नागरिकों के अधिकारों का भी मुख्य उद्देश्य भी नागरिकों को पता भी न चलने पाये। कायदे में इ...

भारत में दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'भारत रत्न' की हुई घोषणा

प्रत्येक वर्ष दिए जाने वाले ‘भारत रत्न’ पुरस्कार की घोषणा की जा चुकी है। जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने ट्विटर के जरिये दी। इस बार भारत रत्न तीन लोगों को दिया जायेगा जिसमें पूर्व राष्ट्रपति एंव कांग्रेस नेता रहे प्रणब मुखर्जी के साथ-साथ नानाजी देशमुख और भुपेन हजारिका को प्रदान किया जाएगा। ‘भारत रत्न’ भारतवर्ष का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की प्रशंसा करते हुए लिखा, “प्रणब दा हमारे समय के बेहतरीन राजनेता हैं। उन्होंने दशकों से इस देश की सेवा निस्वार्थ और अथक भाव से की है जिससे हमारे देश की बेहतरी पर उनकी एक अमिट छाप है। उनकी बुद्धिमत्ता और विद्वता का कोई सानी नहीं। आह्लादित हूँ कि उन्हें ‘भारत रत्न’ दिया जा रहा है।” Pranab Da is an outstanding statesman of our times. He has served the nation selflessly and tirelessly for decades, leaving a strong imprint on the nation's growth trajectory. His wisdom and intellect have few parallels. Delighted that he has been conferred the Bharat Ratna. — Naren...